सरगुजा में एकलव्य स्कूल की छात्राओं का 20 किमी पैदल कलेक्ट्रेट कूच, CM साय ने जताई नाराजगी; जांच के आदेश
अंबिकापुर/सरगुजा। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय की छात्राओं को अपनी समस्याओं को लेकर करीब 20 किलोमीटर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट पहुंचना पड़ा। छात्राओं ने विद्यालय में लंबे समय से चली आ रही मूलभूत सुविधाओं की समस्याओं को लेकर प्रशासन के सामने अपनी शिकायतें रखीं। मामला सामने आने के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे गंभीरता से लेते हुए नाराजगी जताई और अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
तीन महीने से बिजली की समस्या
जानकारी के मुताबिक, शिवपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्रावास में छात्राओं को करीब तीन महीने से बिजली की समस्या का सामना करना पड़ रहा था। इसके अलावा छात्राओं ने मेस में भोजन की व्यवस्था और शिक्षकों की कमी सहित अन्य समस्याओं की भी शिकायत की। लगातार समस्या बने रहने के बाद छात्राओं ने स्कूल से निकलकर कलेक्ट्रेट तक पैदल जाने का फैसला किया।
20 किलोमीटर पैदल पहुंचीं छात्राएं
छात्राएं अपनी समस्याओं को लेकर लगभग 20 किलोमीटर की दूरी तय कर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। छात्राओं के इस कदम ने स्कूल और प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि कई बार समस्याओं की जानकारी देने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं हुआ, जिसके बाद उन्हें स्वयं कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपनी बात रखनी पड़ी।
CM साय ने कलेक्टर को फोन पर लगाई फटकार
मामले की जानकारी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंची तो उन्होंने इसे गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री ने संबंधित जिला कलेक्टर से फोन पर बात कर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि छात्राओं को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए इतनी दूर पैदल चलकर कलेक्ट्रेट तक पहुंचने की स्थिति नहीं आनी चाहिए।
तत्काल समाधान के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को छात्राओं की बिजली, मेस और शिक्षकों से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उन्होंने एकलव्य आवासीय विद्यालयों की व्यवस्था की नियमित समीक्षा और लगातार निरीक्षण सुनिश्चित करने को कहा है, ताकि भविष्य में इस तरह की स्थिति दोबारा सामने न आए।
जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई
मामले में लापरवाही की जांच के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का फोकस अब छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को बेहतर बिजली, भोजन, शिक्षा और आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने पर है।
प्रशासनिक व्यवस्था पर उठे सवाल
एकलव्य विद्यालय आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित किए जाते हैं। ऐसे में छात्राओं का अपनी मूलभूत समस्याओं को लेकर 20 किलोमीटर पैदल कलेक्ट्रेट पहुंचना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर सवाल माना जा रहा है। अब जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि समस्याओं के समाधान में देरी के लिए कौन जिम्मेदार था और आगे क्या कार्रवाई की जाती है।










