मध्य प्रदेश की विवादित जमीन की सुनवाई छत्तीसगढ़ में होगी, हाई कोर्ट ने अधिकार क्षेत्र को लेकर दिया अहम फैसला
बिलासपुर। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के दरैन गांव की जमीन से जुड़े विवाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सिविल अदालत के अधिकार क्षेत्र को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने जनकपुर की सिविल अदालत के आदेश को बरकरार रखते हुए शहडोल निवासी बृजेंद्रनाथ कुशवाहा समेत छह याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी।
मामला दरैन, खरिका टोला और घटई गांवों में स्थित जमीन से जुड़ा है। इनमें दरैन गांव की जमीन मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में है, जबकि खरिका टोला और घटई की जमीन छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में आती है। इन जमीनों को लेकर हक घोषित करने, बंटवारा कराने और स्थायी रोक लगाने की मांग को लेकर जनकपुर सिविल कोर्ट में सिविल वाद दायर किया गया था।
याचिकाकर्ताओं ने उठाया था अदालत के अधिकार क्षेत्र का सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से तर्क दिया गया कि दरैन गांव की जमीन उनकी स्वयं अर्जित संपत्ति है और यह जमीन मध्य प्रदेश में स्थित होने के कारण छत्तीसगढ़ की अदालत को इस पर सुनवाई करने का अधिकार नहीं है। इसी आधार पर सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 16 के तहत आवेदन प्रस्तुत किया गया था।
जनकपुर सिविल कोर्ट ने 10 अगस्त 2026 को इस आवेदन को खारिज कर दिया था। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
हाई कोर्ट ने धारा 17 का दिया हवाला
जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि जब एक ही विवाद से जुड़ी कई अचल संपत्तियां अलग-अलग अदालतों के क्षेत्राधिकार में स्थित हों, तो ऐसा मुकदमा उस अदालत में चलाया जा सकता है, जिसकी सीमा में उन संपत्तियों में से कोई एक संपत्ति स्थित हो।
हाई कोर्ट ने सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 17 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि चूंकि घटई और खरिका टोला की जमीन जनकपुर सिविल कोर्ट की सीमा में आती है, इसलिए वहां पूरे विवाद की सुनवाई करना अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी उल्लेख
हाई कोर्ट ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के शिवनारायण बनाम मणिकलाल मामले में दिए गए फैसले का भी उल्लेख किया। इसी कानूनी सिद्धांत के आधार पर हाई कोर्ट ने जनकपुर सिविल कोर्ट के आदेश को सही माना और छह याचिकाकर्ताओं की याचिका खारिज कर दी।
मुख्य बात: जमीन का एक हिस्सा मध्य प्रदेश में होने के बावजूद, जब उसी विवाद से जुड़ी अन्य संपत्तियां छत्तीसगढ़ की अदालत के क्षेत्र में स्थित हों, तो संबंधित पूरा मुकदमा उस अदालत में चलाया जा सकता है।










