छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का जाति प्रमाणपत्र पर अहम फैसला, छह महीने में आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने संबंधित अधिकारी को लंबित आवेदन पर छह महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामला कोरिया जिले के जनकपुर निवासी दुर्गावती भारती से जुड़ा है, जिन्होंने स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
पिता और भाई को मिल चुका है जाति प्रमाणपत्र
याचिकाकर्ता दुर्गावती भारती के अनुसार, उनके पिता और भाई को पहले ही स्थायी जाति प्रमाणपत्र जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद उनके स्वयं के आवेदन पर निर्णय नहीं लिया जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित अधिकारी वर्ष 1950 से पहले के दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे थे। पुराने दस्तावेज नहीं होने के कारण उनका आवेदन लंबित था।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर राहत की मांग की।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय ने 6 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया। कोर्ट ने भरतपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता के आवेदन पर छत्तीसगढ़ सामाजिक प्रास्थिति प्रमाणन अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के अनुसार निर्णय लिया जाए।
कोर्ट ने दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में उनकी अनुपलब्धता के संबंध में प्रमाणपत्र देने के अनुरोध पर भी नियमानुसार विचार करने का निर्देश दिया। आवेदन पर निर्णय लेते समय संबंधित अधिकारी को उपलब्ध दस्तावेजों और लागू कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना होगा।
छह महीने के भीतर करना होगा निराकरण
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तारीख से छह महीने के भीतर आवेदन पर निर्णय लिया जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने याचिका का निराकरण कर दिया।
जाति प्रमाणपत्र के आवेदकों के लिए महत्वपूर्ण मामला
यह मामला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जिनके स्थायी जाति प्रमाणपत्र के आवेदन पुराने दस्तावेजों की अनुपलब्धता के कारण लंबित हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, संबंधित अधिकारी को आवेदन पर कानून के मुताबिक निर्धारित समय में निर्णय लेना होगा।
हालांकि, इस आदेश का अर्थ यह नहीं है कि याचिकाकर्ता को स्वतः जाति प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया है। प्रमाणपत्र जारी करने का निर्णय संबंधित अधिकारी को उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रावधानों के आधार पर लेना होगा।










