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राहुल गांधी के रवैये पर नरेश चंद्र गुप्ता का निशाना, बोले- ‘जो मैं कहूं, वही सही’ की सोच लोकतंत्र के लिए खतरा

राहुल गांधी के रवैये पर नरेश चंद्र गुप्ता का निशाना, बोले- ‘जो मैं कहूं, वही सही’ की सोच लोकतंत्र के लिए खतरा

 

रायपुर। भाजपा विधि प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक और वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने विपक्ष द्वारा संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए सर्वोच्च न्यायालय, निर्वाचन आयोग, संसद और जांच एजेंसियों जैसी संवैधानिक संस्थाओं पर जनता और राजनीतिक दलों का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।

 

गुप्ता ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और जीवंत लोकतंत्र है। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव में जीत या हार से तय नहीं होती, बल्कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, निष्पक्षता और गरिमा के प्रति सम्मान भी इसका महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने चिंता जताई कि राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में कई बार राष्ट्रहित और संस्थागत मर्यादाओं को पीछे छोड़ दिया जाता है।

 

विरोध प्रदर्शन की परंपरा पर उठाए सवाल

 

नरेश चंद्र गुप्ता के अनुसार, भारतीय राजनीति में विरोध और असहमति की एक गरिमापूर्ण परंपरा रही है। पहले राजनीतिक दल निर्धारित स्थानों पर धरना-प्रदर्शन करके अपनी बात रखते थे। विरोध के दौरान अनुशासन, संसदीय भाषा और कानून का सम्मान बनाए रखने पर जोर दिया जाता था।

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार की नीतियों का विरोध करना उसका अधिकार है। हालांकि, विरोध का तरीका ऐसा होना चाहिए, जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा प्रभावित न हो।

 

संसद और सुरक्षित परिसरों में प्रदर्शन पर जताई चिंता

 

गुप्ता ने कहा कि हाल के वर्षों में कुछ विरोध प्रदर्शनों के दौरान संसद, अति-सुरक्षित परिसरों और प्रधानमंत्री आवास की ओर उग्र मार्च करने जैसी घटनाएं सामने आई हैं। उन्होंने सुरक्षा बलों और पुलिस अधिकारियों के साथ धक्का-मुक्की तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होने की कोशिशों पर भी चिंता जताई।

 

उनका कहना है कि जब मुख्यमंत्री, मंत्री और सांसद जैसे जनप्रतिनिधि कानून-व्यवस्था को चुनौती देते दिखाई देते हैं, तो इससे प्रशासनिक व्यवस्था की साख प्रभावित होती है। उन्होंने राजनीतिक दलों से विरोध प्रदर्शन के दौरान मर्यादा और अनुशासन बनाए रखने की अपील की।

 

चुनाव आयोग और न्यायपालिका पर सवाल उठाने को बताया चिंताजनक

 

वरिष्ठ अधिवक्ता ने निर्वाचन आयोग, सर्वोच्च न्यायालय और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि न्यायालय द्वारा अंतरिम राहत नहीं दिए जाने या साक्ष्यों के आधार पर फैसला सुनाए जाने के बाद उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

 

गुप्ता ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई), प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) जैसी संस्थाओं पर लगातार एकतरफा कार्रवाई के आरोप लगाने से उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। उनके अनुसार, किसी संस्था के निर्णय से असहमति होने पर लोकतांत्रिक और कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से अपनी बात रखनी चाहिए।

 

राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये की आलोचना

 

नरेश चंद्र गुप्ता ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि उनके व्यवहार में ‘जो मैं कहूं, वही सही’ वाली हठधर्मिता दिखाई देती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनी हुई सरकार के अस्तित्व को खारिज करना, संसद की कार्यवाही में लगातार गतिरोध पैदा करना और प्रतिकूल न्यायिक फैसलों के बाद संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।

 

गुप्ता ने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को संवाद और संवैधानिक प्रक्रियाओं के माध्यम से सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्रहित से ऊपर रखने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर सकती है।

 

राष्ट्रहित और संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने पर जोर

 

गुप्ता ने भारतीय राजनीति के इतिहास का उल्लेख करते हुए 1946 में सत्ता हस्तांतरण के दौर का उदाहरण भी दिया। उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्रहित से ऊपर रखने के परिणाम दूरगामी हो सकते हैं।

 

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों की जिम्मेदारी है कि वे संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करें। राजनीतिक दलों को अपने मतभेदों के बावजूद देशहित, कानून के शासन और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए।

 

निष्कर्ष: नरेश चंद्र गुप्ता ने विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों और राहुल गांधी के राजनीतिक रवैये की आलोचना करते हुए संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखने पर जोर दिया। उनके अनुसार, लोकतंत्र में विरोध का अधिकार महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ कानून का सम्मान, अनुशासन और राष्ट्रहित को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

 

नोट: राहुल गांधी और विपक्ष को लेकर व्यक्त किए गए आरोप नरेश चंद्र गुप्ता के बयान और विचार हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्यों के रूप में नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक वक्तव्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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