‘मुर्दों से नहीं, जिंदा इंसानों से डर लगता है’: 1000 पोस्टमार्टम कर चुकीं डॉ. अंकिता खंडेलवाल की बेबाक कहानी
भिलाई। चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ ऐसे काम होते हैं, जिनके लिए असाधारण धैर्य और मानसिक मजबूती की जरूरत होती है। भिलाई की डॉ. अंकिता खंडेलवाल ने अब तक करीब 1000 पोस्टमार्टम किए हैं। अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें मुर्दों से नहीं, बल्कि जिंदा इंसानों से डर लगता है।
डॉ. अंकिता के लिए पोस्टमार्टम केवल एक चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि मौत के पीछे छिपे सच को सामने लाने की जिम्मेदारी है। हर मामले में वे चिकित्सकीय तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर मौत के कारणों को समझने का प्रयास करती हैं।
अनुभवों ने बनाया मजबूत
लगातार पोस्टमार्टम करने के दौरान डॉ. अंकिता ने अलग-अलग परिस्थितियों में हुई मौत के मामलों को करीब से देखा है। उनका कहना है कि इस काम के लिए भावनाओं पर नियंत्रण के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण भी जरूरी है।
उन्होंने बताया कि शुरुआत में यह काम चुनौतीपूर्ण जरूर लगा, लेकिन समय के साथ अनुभव बढ़ता गया और पेशेवर जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण बन गई।
मौत के पीछे का सच सामने लाना उद्देश्य
फोरेंसिक मेडिसिन के क्षेत्र में पोस्टमार्टम की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। कई मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट जांच की दिशा तय करने में मदद करती है। डॉ. अंकिता का काम भी इसी जिम्मेदारी से जुड़ा है, जहां चिकित्सकीय जांच के जरिए मृत्यु के कारणों से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों को सामने लाया जाता है।
डॉ. अंकिता की करीब 1000 पोस्टमार्टम की यात्रा चिकित्सा क्षेत्र में उनके अनुभव और पेशेवर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उनका बेबाक नजरिया इस चुनौतीपूर्ण पेशे की अलग तस्वीर सामने रखता है।










