छत्तीसगढ़ में बिजनेस करना होगा आसान, सरकार ने बनाया 90 दिन का प्लान; 33 जिलों में डिजिटल होंगे पुराने राजस्व रिकॉर्ड
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश में कारोबार और सरकारी सेवाओं की प्रक्रिया को आसान और तेज बनाने के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट-2026 लागू करने की दिशा में 90 दिन की कार्ययोजना तैयार की है। मुख्य सचिव विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय में हुई बैठक में एक्ट के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए।
43 सेवाओं और 8 विभागों की होगी समीक्षा
सरकार की योजना के तहत एक्ट के दायरे में आने वाली 43 सेवाओं, 9 सरकारी अधिनियमों और 8 विभागों की समीक्षा की जाएगी। इसमें यह देखा जाएगा कि नागरिकों और कारोबारियों को सेवाएं तय समयसीमा में मिल रही हैं या नहीं।
खास बात यह है कि यदि निर्धारित समय में किसी सेवा से संबंधित प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता है तो नियमों के तहत डीम्ड अप्रूवल यानी स्वतः मंजूरी का प्रावधान लागू होगा। देरी होने की स्थिति में संबंधित नियमों के अनुसार जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
सरकारी सेवाओं की रोजाना समीक्षा की जाएगी, जबकि हर तीन महीने में इसकी व्यापक निगरानी होगी। इसके लिए संबंधित विभागों को नोडल अधिकारी और कामकाज की प्रक्रिया से जुड़ी एसओपी तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।
तीन स्तर पर होगी निगरानी
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस एक्ट के क्रियान्वयन की निगरानी तीन स्तरों पर की जाएगी। राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली एपेक्स काउंसिल, प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली कार्यकारी समिति और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला सशक्त समिति जिम्मेदारी संभालेगी।
33 जिलों में डिजिटल होंगे पुराने राजस्व रिकॉर्ड
सरकार ने नागरिक सेवाओं को डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए वसुंधरा प्रोजेक्ट के तहत राजस्व रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण पर भी जोर दिया है। पहले चरण में चयनित जिलों के पुराने राजस्व दस्तावेजों को डिजिटल किया जाएगा। इसके बाद इस व्यवस्था को प्रदेश के सभी 33 जिलों में लागू करने की योजना है।
इस प्रक्रिया में अधिकार अभिलेख पंजी, मिसल, निस्तार पत्रक, खसरा, राजस्व न्यायालय के आदेश, गांव के नक्शे, संशोधन पंजी, वर्ष 2020 से पहले के खसरा पंचशाला रिकॉर्ड और किश्तबंदी खतौनी जैसे दस्तावेजों की स्कैनिंग और डाटा एंट्री की जाएगी।
ऑनलाइन मिलेगी प्रमाणित डिजिटल कॉपी
डिजिटल किए गए राजस्व रिकॉर्ड को सेवा सेतु पोर्टल से जोड़ा जाएगा। इसके बाद नागरिक ऑनलाइन आवेदन करने, फीस जमा करने, आवेदन की स्थिति देखने और प्रमाणित डिजिटल कॉपी प्राप्त करने जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे।
पुराने हाथ से लिखे दस्तावेजों को भी आसानी से खोजने के लिए बारकोड, OCR और AI आधारित सर्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पुराने रिकॉर्ड को खोजने और उनके उपयोग की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य है।
सरकार का उद्देश्य सरकारी प्रक्रियाओं में समयबद्धता बढ़ाना, कारोबार से जुड़ी मंजूरियों को सरल बनाना और राजस्व रिकॉर्ड को सुरक्षित एवं डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध कराना है।










