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CGPSC 2003 भर्ती घोटाला: 15 अधिकारियों पर चार्जशीट की तैयारी, EOW इसी महीने कोर्ट में पेश कर सकती है चालान

CGPSC 2003 भर्ती घोटाला: 15 अधिकारियों पर चार्जशीट की तैयारी, EOW इसी महीने कोर्ट में पेश कर सकती है चालान

रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की वर्ष 2003 की राज्य सेवा भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW-ACB) अब कार्रवाई को अंतिम चरण में ले जा रहा है। जांच एजेंसी इस मामले में करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट पेश करने की तैयारी में है। अधिकारियों के अनुसार चालान की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और इसे सितंबर के अंत तक कोर्ट में पेश किया जा सकता है। हालांकि, इससे पहले सरकार से अभियोजन की अनुमति लेना जरूरी होगा।

 

2003 की भर्ती परीक्षा में सामने आई थी गड़बड़ी

 

मामला छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद हुई पहली राज्य सेवा भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। वर्ष 2003 में आयोजित इस परीक्षा में चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए थे। जांच में कुछ अभ्यर्थियों को नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाने और योग्य अभ्यर्थियों के चयन से बाहर होने की बात सामने आई।

 

मामले की जांच के बाद यह विवाद हाई कोर्ट तक पहुंचा था। हाई कोर्ट की चीफ जस्टिस की बेंच ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को सही माना था और नई चयन सूची तैयार करने की सिफारिश की थी। इसके बाद मामला वर्ष 2016 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी गई थी।

 

ड्राई रन में सामने आईं कई अनियमितताएं

 

EOW की जांच में दोबारा डेटा की गणना के लिए किए गए ड्राई रन में भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं। जांच के अनुसार:

 

17 अपात्र अभ्यर्थियों का चयन हुआ।

 

17 योग्य अभ्यर्थियों को चयन से बाहर किया गया।

 

56 अभ्यर्थियों के पद और मेरिट क्रम में बदलाव पाया गया।

 

52 अपात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया।

 

वहीं इतने ही पात्र अभ्यर्थियों को इंटरव्यू का अवसर नहीं मिलने की बात सामने आई।

 

 

वर्षा डोंगरे के मामले ने भी उठाए सवाल

 

इस भर्ती घोटाले में कवर्धा की अभ्यर्थी वर्षा डोंगरे का मामला भी महत्वपूर्ण रहा। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 1290.41 अंक हासिल किए थे, लेकिन इसके बावजूद उनका चयन नहीं हुआ। उनकी प्रोफाइल शीट में आबकारी उप निरीक्षक पद से जुड़ी काट-छांट भी जांच के दौरान सामने आई।

 

फोरेंसिक जांच में संबंधित लिखावट और स्याही को लेकर भी सवाल उठे। इसके अलावा मानव विज्ञान विषय में समान वास्तविक अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को स्केलिंग के बाद अलग-अलग अंक दिए जाने की बात जांच में सामने आई।

 

आरक्षण को लेकर भी उठे सवाल

 

जांच में आरक्षण प्रक्रिया को लेकर भी कथित अनियमितता का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक एक अनारक्षित अभ्यर्थी को ST कोटे में राज्य लेखा सेवा का पद दिए जाने का मामला सामने आया था।

 

अब 15 अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी

 

EOW-ACB की जांच के आधार पर अब भर्ती प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले करीब 15 अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट की तैयारी की जा रही है। हालांकि, चार्जशीट कोर्ट में दाखिल होने और आरोप साबित होने के बाद ही संबंधित व्यक्तियों की कानूनी जिम्मेदारी तय होगी।

 

मामले में कई अधिकारियों को समय के साथ पदोन्नति मिलने और कुछ को IAS अवार्ड मिलने की बात भी सामने आई है। ऐसे में करीब दो दशक पुराने इस भर्ती प्रकरण में प्रस्तावित चार्जशीट को महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है।

 

 

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