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नवीन कानून से लेकर साइबर सुरक्षा तक, बिलासपुर में पुलिसकर्मियों को मिली खास ट्रेनिंग

नवीन कानून से लेकर साइबर सुरक्षा तक, बिलासपुर में पुलिसकर्मियों को मिली खास ट्रेनिंग

 

बिलासपुर। पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यकुशलता, विवेचना क्षमता और तकनीकी जानकारी को अपडेट करने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस लाइन के चेतना हॉल में तीन दिवसीय रेंज स्तरीय रिफ्रेशर कोर्स आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में बिलासपुर रेंज के विभिन्न जिलों से आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर तक के 150 अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए।

 

BNS, BNSS और BSA के प्रावधानों की दी जानकारी

 

प्रशिक्षण के इनडोर सत्र में पुलिसकर्मियों को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के महत्वपूर्ण प्रावधानों और संशोधनों की जानकारी दी गई। विवेचना के दौरान नए कानूनों को व्यवहार में सही तरीके से लागू करने और जांच से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।

 

साइबर अपराध और फॉरेंसिक जांच पर भी प्रशिक्षण

 

तकनीकी पुलिसिंग के तहत पुलिसकर्मियों को साइबर सुरक्षा, साइबर अपराध, CCTNS तथा अपराध अनुसंधान में फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। बदलते तकनीकी दौर में साइबर अपराधों की जांच और डिजिटल साक्ष्यों के इस्तेमाल को लेकर भी प्रशिक्षण दिया गया।

 

शस्त्र संचालन और बलवा ड्रिल का अभ्यास

 

प्रशिक्षण के आउटडोर सत्र में पीटी-परेड, शस्त्रों को खोलने-जोड़ने और बलवा ड्रिल का अभ्यास कराया गया। इसका उद्देश्य पुलिसकर्मियों की शारीरिक दक्षता, अनुशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी परिस्थितियों में टीम के साथ प्रभावी कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करना रहा।

 

तनाव प्रबंधन और योग पर भी जोर

 

पुलिसकर्मियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण में तनाव प्रबंधन, योग और फिजियोथैरेपी से जुड़े सत्र भी आयोजित किए गए। तनाव कम करने और ड्यूटी के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने के उपाय बताए गए।

 

बीट सिस्टम को मजबूत बनाने के निर्देश

 

समापन सत्र में आईजी रामगोपाल गर्ग ने पुलिसकर्मियों से संवाद किया और विवेचना व पुलिस कार्यप्रणाली से जुड़े विषयों पर चर्चा की। उन्होंने बीट सिस्टम और सामुदायिक पुलिसिंग को प्रभावी बनाने पर जोर दिया। पुलिस के अनुसार स्थानीय स्तर पर लगातार जानकारी जुटाने और समुदाय के साथ बेहतर समन्वय से अपराध की रोकथाम तथा आरोपियों की पहचान में मदद मिल सकती है।

 

प्रशिक्षण के दौरान पुलिस और आम नागरिकों के बीच संवाद, विश्वास और सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई। तीन दिवसीय प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए गए।

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