छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट का अहम निर्देश: यौन अपराध मामलों में संवेदनशील भाषा के इस्तेमाल पर जोर
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने यौन अपराध और अन्य संवेदनशील मामलों की सुनवाई के दौरान पीड़ितों की गरिमा बनाए रखने को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में इस्तेमाल होने वाली भाषा संवेदनशील और सम्मानजनक होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक प्रक्रिया में पीड़ित की पहचान, गरिमा और मानसिक स्थिति का ध्यान रखा जाना जरूरी है। अदालत और जांच प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों को ऐसे शब्दों और टिप्पणियों से बचना चाहिए, जिनसे पीड़ित की गरिमा प्रभावित हो।
कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि यौन अपराध के मामलों में निर्णय कानूनी साक्ष्यों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होना चाहिए। पीड़ित के चरित्र या निजी जीवन से जुड़े अनावश्यक संदर्भों को मामले का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए।
हाई कोर्ट की इस टिप्पणी को संवेदनशील मामलों में न्यायिक और जांच प्रक्रिया को अधिक पीड़ित-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।










