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पोड़ी-उपरोड़ा में शिक्षकों से 200 रुपये वसूली का मामला, आदेश को लेकर उठे सवाल

पोड़ी-उपरोड़ा में शिक्षकों से 200 रुपये वसूली का मामला, आदेश को लेकर उठे सवाल

 

कोरबा/पोड़ी-उपरोड़ा। जिले में शिक्षकों से 200 रुपये लिए जाने को लेकर सामने आया विवाद अब पोड़ी-उपरोड़ा विकासखंड तक पहुंच गया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक संदेश/जानकारी में शिक्षकों से 200 रुपये की राशि जमा कराने की बात कही जा रही है। इसके बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और इस राशि की वसूली के आधार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

 

बताया जा रहा है कि यह राशि ‘शिक्षा दान रथ’ से संबंधित बताई जा रही है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार कोरबा जिले में इस संबंध में शिक्षकों से 200 रुपये की वसूली का कोई स्पष्ट आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है। इसी तरह के एक मामले में संकुल समन्वयक को भ्रामक सूचना फैलाने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

 

वायरल संदेश के बाद बढ़ी चर्चा

 

पोड़ी-उपरोड़ा क्षेत्र में शिक्षकों के बीच 200 रुपये की राशि जमा कराने की बात सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। शिक्षक यह जानना चाह रहे हैं कि राशि किस आदेश के तहत ली जा रही है, इसका उपयोग किस मद में किया जाएगा और इसके लिए विभागीय स्तर पर किस अधिकारी की अनुमति है।

 

मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ा है क्योंकि इससे पहले कोरबा जिले में शिक्षकों से 200 रुपये लिए जाने संबंधी कथित आदेश को लेकर विवाद सामने आ चुका है। अब पोड़ी-उपरोड़ा में भी ऐसी ही जानकारी वायरल होने से शिक्षा विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

 

किसके निर्देश पर हो रही वसूली?

 

सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विभाग की ओर से 200 रुपये जमा कराने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं है, तो फिर शिक्षकों तक यह निर्देश कैसे पहुंचा। शिक्षकों के बीच वायरल सूचना में राशि जमा कराने की बात सामने आने के बाद संबंधित अधिकारियों से स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठ रही है।

 

फिलहाल पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 200 रुपये की राशि वास्तव में किस उद्देश्य से मांगी गई, किस स्तर से निर्देश जारी हुआ और राशि जमा कराने की प्रक्रिया किसके आदेश पर चल रही थी।

 

जांच के बाद ही स्थिति होगी साफ

 

मामले में विभागीय स्तर पर जांच या स्पष्टीकरण के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा बिना अधिकृत आदेश के शिक्षकों से राशि जमा कराने का निर्देश दिया गया है, तो उस पर कार्रवाई का सवाल भी उठ सकता है। वहीं यदि इसके पीछे कोई वैध विभागीय प्रक्रिया है, तो संबंधित आदेश और उसका उद्देश्य सार्वजनिक किए जाने से भ्रम की स्थिति समाप्त हो सकती है।

 

**फिलहाल पोड़ी-उपरोड़ा में 200 रुपये की कथित वसूली को लेकर शिक्षकों के बीच चर्चा तेज है और पूरे मामले में शिक्षा विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण का इंतजार है।**

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