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एमपी में 1.45 लाख साल के पेड़ों पर चली आरी, छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी बोरर का खतरा

एमपी में 1.45 लाख साल के पेड़ों पर चली आरी, छत्तीसगढ़ के जंगलों में भी बोरर का खतरा

 

रायपुर। मध्यप्रदेश के जंगलों में साल के पेड़ों पर बोरर कीट के बड़े प्रकोप के बाद अब छत्तीसगढ़ वन विभाग ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। प्रदेश के साल बहुल वन क्षेत्रों में बोरर कीट की स्थिति का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू किया गया है। वन विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में पेड़ों की स्थिति और संभावित संक्रमण की निगरानी कर रही हैं।

 

मध्यप्रदेश में बोरर कीट के गंभीर प्रकोप के कारण करीब 1.45 लाख साल के पेड़ों की कटाई को मंजूरी दी गई है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में साल के पेड़ इस कीट की चपेट में आए हैं। इसके बाद छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में भी संक्रमण को लेकर निगरानी बढ़ाई गई है।

 

संक्रमण मिलने पर होगी कार्रवाई

 

वन विभाग के अनुसार सर्वे के दौरान यदि किसी क्षेत्र में बोरर कीट का संक्रमण पाया जाता है तो स्थिति के आधार पर नियंत्रण के उपाय किए जाएंगे। जरूरत पड़ने पर कीटनाशक का छिड़काव करने के साथ संक्रमित पेड़ों को काटकर हटाने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

 

कोरबा में पहले भी सामने आ चुका है मामला

 

छत्तीसगढ़ में साल बोरर का खतरा पहले भी सामने आ चुका है। कोरबा वन मंडल के बालको क्षेत्र में वर्ष 2022-23 के दौरान करीब 1,200 साल के पेड़ बोरर से प्रभावित पाए गए थे। वन विभाग ने प्रभावित पेड़ों पर दवा का छिड़काव और उपचार किया था। संक्रमण पूरी तरह नियंत्रित नहीं होने के बाद केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की अनुमति से 923 प्रभावित पेड़ों की कटाई का रास्ता साफ हुआ था।

 

पेड़ के तने को अंदर से खोखला करता है कीट

 

साल हार्टवुड बोरर का वैज्ञानिक नाम हाप्लोसेरेंबिक्स स्पिनिकार्निस है। मानसून के आसपास वयस्क कीट निकलते हैं और सामान्यतः कमजोर, गिरे या क्षतिग्रस्त साल के पेड़ों की ओर आकर्षित होते हैं। संक्रमण बढ़ने पर स्वस्थ पेड़ भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

 

मादा कीट पेड़ की छाल की दरारों में अंडे देती है। इसके बाद निकलने वाले लार्वा छाल के नीचे और फिर लकड़ी के भीतर सुरंग बनाते हैं। पेड़ के तने में छेद, लकड़ी का बुरादा और रेजिन का रिसाव इसके प्रमुख संकेत माने जाते हैं।

 

बस्तर से सरगुजा तक निगरानी

 

छत्तीसगढ़ में साल के बड़े वन क्षेत्र मौजूद हैं। बस्तर, सरगुजा, कोरबा समेत कई वन क्षेत्रों में साल के जंगल फैले हुए हैं। राज्य के लगभग 33 प्रतिशत वन क्षेत्र में साल के पेड़ पाए जाते हैं और साल छत्तीसगढ़ का राजकीय वृक्ष भी है। ऐसे में बोरर कीट का संक्रमण वन विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

 

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं संचालक, छत्तीसगढ़ वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान कौशलेन्द्र कुमार के अनुसार मध्यप्रदेश में बोरर के प्रकोप को देखते हुए छत्तीसगढ़ के साल वन क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई गई है। सर्वे के दौरान संक्रमण मिलने पर उसकी स्थिति के अनुसार आवश्यक नियंत्रण उपाय किए जाएंगे।

 

 

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