स्कूल का भारी गेट गिरने से 7 साल के मासूम की मौत, प्रशासन ने दिए FIR के निर्देश
बलौदाबाजार/हथबंद। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के हथबंद स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय विद्यालय में दर्दनाक हादसा हो गया। स्कूल का भारी लोहे का मुख्य गेट अचानक गिरने से 7 वर्षीय बालक शिवम यादव उसकी चपेट में आ गया। हादसे में बच्चे की मौके पर ही मौत हो गई।
बताया गया कि शिवम तीज पर्व के दौरान अपने परिजनों से मिलने रतनपुर से हथबंद आया हुआ था। इसी दौरान वह स्कूल परिसर में पहुंचा, जहां अचानक मुख्य गेट भरभराकर गिर गया। भारी गेट के नीचे दबने से उसकी जान चली गई।
जर्जर था स्कूल का मुख्य गेट
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों में काफी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के मुख्य गेट का कॉलम करीब तीन महीने से जर्जर हालत में था। गेट ऊपर और नीचे से अपनी पकड़ छोड़ चुका था और कथित तौर पर केवल एक पट्टी और कील के सहारे टिका हुआ था। इसके बावजूद समय रहते उसकी मरम्मत नहीं कराई गई।
ग्रामीणों ने स्कूल प्रबंधन और विकास समिति पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूल में बच्चों से विकास शुल्क भी लिया जाता है, ऐसे में परिसर की सुरक्षा और रखरखाव को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
मौके पर पहुंचे अधिकारी, FIR के निर्देश
घटना की जानकारी मिलते ही सिमगा एसडीएम अतुल शेटे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। एसडीएम ने मामले में तत्काल FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
मृत बालक के शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सिमगा भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि जांच और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
परिवार को 70 हजार रुपये की प्रारंभिक सहायता
हादसे के बाद प्रशासन की ओर से पीड़ित परिवार को 50 हजार रुपये की अंतरिम सहायता दी गई। कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम ने सिमगा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर परिजनों को यह राशि सौंपी। वहीं, शाला प्रबंधन की ओर से भी प्रारंभिक तौर पर 20 हजार रुपये की सहायता दी गई है।
ग्रामीणों ने की कड़ी कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों ने स्कूल प्रबंधन की जवाबदेही तय करने और लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जर्जर गेट की समय रहते मरम्मत कर दी जाती तो यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था।
मुख्य सवाल यह है कि जिस गेट की हालत पहले से खराब बताई जा रही थी, उसे समय रहते सुरक्षित क्यों नहीं किया गया। अब पुलिस जांच के बाद ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तस्वीर साफ होगी।










