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वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार, परिवार या समाज नहीं कर सकता हस्तक्षेप : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

शीर्षक: वयस्कों को जीवनसाथी चुनने का पूरा अधिकार, परिवार या समाज नहीं कर सकता हस्तक्षेप : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

 

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है। यदि दो वयस्क अपनी इच्छा से साथ रहना या विवाह करना चाहते हैं, तो उनके निर्णय में परिवार, समाज या किसी अन्य व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।

 

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन के अधिकार के तहत प्रत्येक वयस्क अपने जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण फैसले स्वयं लेने के लिए स्वतंत्र है। अदालत ने कहा कि केवल सामाजिक या पारिवारिक असहमति के आधार पर किसी जोड़े को परेशान करना या उनके संबंधों में बाधा डालना उचित नहीं है।

 

न्यायालय ने यह भी माना कि संविधान प्रत्येक नागरिक को गरिमा के साथ जीवन जीने और अपनी पसंद के व्यक्ति के साथ संबंध स्थापित करने का अधिकार देता है। ऐसे मामलों में प्रशासन और पुलिस की जिम्मेदारी है कि वे संबंधित व्यक्तियों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और उनके अधिकारों की रक्षा करें।

 

हाईकोर्ट की इस टिप्पणी को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और वयस्कों के वैवाहिक अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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