ताड़ोकी-रावघाट रेल लाइन को हरी झंडी, 95 किमी परियोजना का अंतिम चरण पूरा
रायपुर। दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन परियोजना ने महत्वपूर्ण चरण पूरा कर लिया है। परियोजना के अंतिम 17.5 किलोमीटर लंबे ताड़ोकी-रावघाट रेल खंड का रेल संरक्षा आयुक्त (CRS) द्वारा निरीक्षण और स्पीड ट्रायल पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही करीब 95 किलोमीटर लंबी दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के पूरे मार्ग पर रेल परिचालन की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।
ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन का CRS निरीक्षण पूरा
ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन सिंगल लाइन विद्युतीकृत ब्रॉडगेज रेल खंड है। 22 सितंबर 2026 को रेलवे सुरक्षा आयुक्त ने इस रेलखंड का निरीक्षण करते हुए स्पीड ट्रायल भी किया। निरीक्षण के दौरान रेल पटरी, पुल-पुलियों, विद्युतीकरण, सिग्नलिंग और अन्य सुरक्षा एवं तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की गई।
दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक पहले से चल रही ट्रेन
फिलहाल दल्लीराजहरा से ताड़ोकी तक यात्री रेल सेवा उपलब्ध है। ताड़ोकी-रावघाट सेक्शन के तैयार होने के बाद रेल सेवा को आगे रावघाट तक विस्तार देने का रास्ता तैयार हुआ है। इससे रावघाट और आसपास के दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्य रेल नेटवर्क से बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है।
लौह अयस्क परिवहन में मिलेगी बड़ी मदद
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन का एक प्रमुख उद्देश्य रावघाट क्षेत्र से लौह अयस्क को भिलाई स्टील प्लांट तक पहुंचाने के लिए रेल परिवहन को मजबूत करना है। रेल कनेक्टिविटी बढ़ने से खनिज परिवहन अधिक सुगम होगा और क्षेत्र की औद्योगिक लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों को भी मिलेगा लाभ
रेल लाइन का फायदा केवल औद्योगिक परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। रावघाट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए रायपुर, भिलाई तथा अन्य प्रमुख शहरों तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार से जुड़े अवसरों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा कृषि उत्पादों और स्थानीय व्यापार से जुड़े सामान को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में भी रेल परिवहन मददगार होगा। बेहतर रेल कनेक्टिविटी से क्षेत्र में निवेश, व्यापार और अन्य आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
95 किलोमीटर की परियोजना का अहम पड़ाव
दल्लीराजहरा-रावघाट नई रेल लाइन करीब 95 किलोमीटर लंबी है। इसके अंतिम 17.5 किलोमीटर हिस्से के पूरा होने और CRS निरीक्षण के बाद परियोजना ने एक अहम पड़ाव पार किया है। अब आवश्यक प्रक्रियाओं और अनुमतियों के बाद ताड़ोकी से रावघाट तक रेल परिचालन शुरू होने का रास्ता आगे बढ़ा है।
यह रेल परियोजना दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को बेहतर परिवहन नेटवर्क से जोड़ने के साथ-साथ भिलाई के इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक लौह अयस्क परिवहन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।










