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छत्तीसगढ़ में LPG गैस घोटाला: 90 टन गैस चोरी, 1.5 करोड़ की हेराफेरी, मैनेजर गिरफ्तार

महासमुंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में एलपीजी गैस की कालाबाज़ारी का एक बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि प्लांट में खड़े टैंकरों से करीब 90 मीट्रिक टन गैस चोरी कर बाजार में बेची गई। इस गैस की कीमत लगभग 1.5 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

पुलिस के अनुसार, यह घोटाला मार्च के अंतिम सप्ताह से 6 अप्रैल 2026 के बीच सुनियोजित तरीके से किया गया। मामले में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स अभनपुर (उरला) के मालिक संतोष ठाकुर, डायरेक्टर सार्थक ठाकुर और प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव पर मिलीभगत के आरोप हैं। आरोप है कि कैप्सूल वाहनों में भरी गैस को धीरे-धीरे निकालकर अलग-अलग टैंकरों के जरिए बाजार में खपाया गया।

जांच के दौरान कैप्सूल वाहनों में लगे GPS सिस्टम से पूरे मामले का खुलासा हुआ। रिकॉर्ड के अनुसार 31 मार्च को 2 कैप्सूल, 1 अप्रैल को 1, 3 अप्रैल को 1 और 5 अप्रैल को 2 कैप्सूल से गैस निकाली गई। इस तरह कुल 6 कैप्सूल से 90 मीट्रिक टन गैस की हेराफेरी की गई।

दस्तावेजों की जांच में भी भारी गड़बड़ी सामने आई है। रिकॉर्ड में अप्रैल महीने में केवल 47 टन गैस खरीदी दिखी, जबकि 107 टन से अधिक गैस की बिक्री दर्ज है। खरीद और बिक्री के बीच यह बड़ा अंतर घोटाले की ओर इशारा करता है।

पूछताछ में कर्मचारियों ने बताया कि यह काम अधिकारियों के निर्देश पर किया गया। गैस को पहले प्लांट के बुलेट टैंक में उतारा जाता था, फिर निजी टैंकरों के जरिए अलग-अलग जगह भेजा जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि रायपुर और आसपास के इलाकों में बिना पक्के बिल के गैस सप्लाई की जा रही थी।

जानकारी के अनुसार, जिन 6 कैप्सूल वाहनों से गैस निकाली गई, उन्हें पहले प्रशासन ने सुरक्षा के लिए प्लांट को सौंपा था। बाद में उन्हीं का दुरुपयोग कर इस पूरे घोटाले को अंजाम दिया गया।

मामले में अब तक प्लांट मैनेजर निखिल वैष्णव को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

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