नौ माह की बेटी को गोद में लेकर उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचती हैं शिक्षिका, 9 बच्चों की पढ़ाई के लिए रोज उठाती हैं जोखिम
बलरामपुर/अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड के धौरपुर गांव में शिक्षिकाओं के समर्पण की तस्वीर सामने आई है। यहां प्राथमिक शाला में पदस्थ शिक्षिका कर्मिला टोप्पो अपनी नौ माह की बेटी को गोद में लेकर उफनती नदी पार कर स्कूल पहुंचती हैं। उनके साथ दूसरी शिक्षिका संध्या हलदार भी प्रतिदिन इसी कठिन रास्ते से स्कूल पहुंचती हैं। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद मामला चर्चा में है।
3 किलोमीटर पैदल रास्ते के बाद पार करनी पड़ती है नदी
धौरपुर गांव मढ़ना ग्राम पंचायत का आश्रित गांव है, जो जंगलों के बीच बसा हुआ है। यहां करीब 15 से 20 घर हैं। गांव में वर्ष 2005 से प्राथमिक शाला संचालित है और वर्तमान में स्कूल में नौ बच्चे दर्ज हैं।
स्कूल तक पहुंचने के लिए शिक्षिकाओं को पहले करीब तीन किलोमीटर का पथरीला रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। इसके बाद मोरन और इरिया नदी के संगम को पार करके स्कूल तक पहुंचना होता है। बारिश के मौसम में नदी का जलस्तर और बहाव बढ़ जाने से यह रास्ता बेहद जोखिम भरा हो जाता है।
2014 से इसी स्कूल में पदस्थ हैं कर्मिला टोप्पो
शिक्षिका कर्मिला टोप्पो वर्ष 2014 से धौरपुर के इसी स्कूल में पदस्थ हैं। उनका कहना है कि हर साल बरसात के दौरान उन्हें इसी तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि नदी पार करते समय डर लगता है और पैर फिसलने का खतरा भी रहता है। लेकिन स्कूल में बच्चे उनका इंतजार करते हैं। घर पर नौ माह की बेटी को छोड़ने की व्यवस्था नहीं होने के कारण वह बच्ची को अपने साथ लेकर स्कूल जाती हैं।
प्रशासन की व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल
शिक्षिकाओं के इस समर्पण के साथ ही गांव की बुनियादी सुविधाओं और आवागमन की व्यवस्था को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। बारिश के दौरान जब नदी का बहाव तेज हो जाता है, तब शिक्षिकाओं और बच्चों की सुरक्षा बड़ी चिंता बन जाती है।
ऐसे में बरसात के दौरान बच्चों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, नजदीकी आश्रम या छात्रावास में रहने की सुविधा अथवा सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था किए जाने की जरूरत बताई जा रही है।
कलेक्टर ने शिक्षिकाओं के जज्बे को सराहा
मामला सामने आने के बाद बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने शिक्षिकाओं के समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि बरसात के दौरान छोटे बच्चे को साथ लेकर नदी पार करने और तीन किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचने वाली शिक्षिका ने कर्तव्य के प्रति निष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
कलेक्टर ने ऐसे शिक्षकों के समर्पण को सम्मान योग्य बताते हुए उनकी सराहना की है।
बच्चों की पढ़ाई जारी रखने के लिए जोखिम
धौरपुर की यह घटना एक ओर शिक्षिकाओं की जिम्मेदारी और बच्चों की पढ़ाई के प्रति उनके समर्पण को सामने लाती है, वहीं दूसरी ओर दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और सुरक्षित आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत भी उजागर करती है। बरसात के मौसम में शिक्षिकाओं को नदी पार कर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है, ऐसे में स्थायी और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था की मांग महत्वपूर्ण हो जाती है।










