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200 साल पुरानी ‘बंधा मतऊर’ परंपरा का आयोजन, तालाब में उतरे हजारों ग्रामीण

200 साल पुरानी ‘बंधा मतऊर’ परंपरा का आयोजन, तालाब में उतरे हजारों ग्रामीण

 

छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में सदियों पुरानी आदिवासी परंपरा ‘बंधा मतऊर’ का आयोजन इस वर्ष भी उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया गया। कोंडागांव जिले के बरकई गांव में आयोजित इस अनोखे सामुदायिक मछली शिकार उत्सव में करीब 50 गांवों के हजारों ग्रामीण शामिल हुए।

 

परंपरा के अनुसार ग्रामीण एक साथ तालाब में उतरकर पारंपरिक तरीके से मछलियां पकड़ते हैं। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर लोगों में खास उत्साह देखने को मिला। ग्रामीणों ने इसे अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामुदायिक एकता का प्रतीक बताया।

 

स्थानीय बुजुर्गों के मुताबिक ‘बंधा मतऊर’ परंपरा करीब 200 वर्षों से चली आ रही है। हर साल बड़ी संख्या में लोग इसमें भाग लेते हैं और सामूहिक रूप से मछली पकड़ने के बाद आपस में बांटते हैं। इस आयोजन को देखने आसपास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचे।

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