हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: जमीन गंवाने वालों को नौकरी देना होगा, SECL की मनमानी नीति पर रोक
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जमीन अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि जिन लोगों की जमीन अधिग्रहित की गई है, उन्हें उस समय लागू पुनर्वास नीति के अनुसार नौकरी का लाभ दिया जाना चाहिए। बाद में बनाई गई नई नीति लागू कर रोजगार से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामला एसईसीएल (SECL) द्वारा भूमि अधिग्रहण के बाद रोजगार देने से जुड़े विवाद का था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी जमीन वर्ष 2005-07 के दौरान अधिग्रहित की गई थी, जब 1991 की पुनर्वास नीति लागू थी। इसके बावजूद एसईसीएल ने 2012 की नई नीति लागू कर दो एकड़ से कम जमीन वाले प्रभावितों को नौकरी देने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण की तारीख पर लागू नीति ही प्रभावी होगी। बाद में लाई गई नीति के आधार पर प्रभावितों के अधिकार खत्म नहीं किए जा सकते। अदालत ने एसईसीएल के आदेश को निरस्त करते हुए संबंधित प्रभावितों के दावों पर 1991 की पुनर्वास नीति के अनुसार 45 दिनों के भीतर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया।
अदालत ने यह भी कहा कि भूमि खोने वाले लोगों को पुनर्वास और रोजगार का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार है। ऐसे अधिकार से मनमाने तरीके से वंचित करना अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन है।










